आज के इस तेजी से बढते युग में जूता उद्योग केवल कला आर्ट ही नहीं है बल्कि एक तकनीकी क्षेत्र है। केन्द्रीय पादुका प्रशिक्षण संस्थान आगरा के लिए एक वरदान है जो कि जूता उद्योग में आने वाली चुनौतियों को पूर्ण रूप से मुकाबला कर सकता है।
 

हाल ही में कुछ सालों से जूता उद्योग अकुशल क्षेत्र से व्यावसायिक क्षेत्र में बदल चुका है और इस क्षेत्र को बढ़ाने में विकास हुआ है। जूता उद्योग को अब नये चैलेन्ज का मुकाबला करना है। भारत सरकार जूता उद्योग के विकास के लिए आगरा में 1963 में केन्द्रीय पादुका प्रशिक्षण संस्थान, उद्योग और वित्त मंत्रालय की सहायता से लघु उद्योग विकास संस्थान के रूप में और 1966 में यह केन्द्र स्वतन्त्र संस्था बन गया और इसका परिवर्तित नाम केन्द्रीय पादुका प्रशिक्षण संस्थान (सी.एफ.टी.आई.) एक भारत सरकार की संस्था हो गया।
 

इस प्रशिक्षण केन्द्र में आधुनिक कम्प्यूटर लेब है जो कि यूनाइटेड नेशन्स इंडस्ट्रियल डेवलमेंट आर्गनाइजेशन की सहायता से सुसज्जित हुई है और आधुनिक आयातित मशीनों से कार्यशाला तैयार की गयी जहॉ पर कि चमड़े की और जूतों की फिजिकल टेस्टिंग के लिए मशीनें उपलब्ध है। उच्च दर्जे की मानव संसाधन इस प्रशिक्षण केन्द्र की सबसे बड़ी सम्पत्ति है केन्द्रीय पादुका प्रशिक्षण संस्थान फैकल्टी के सदस्य अपनी कार्यकुशलता में काफी निपुण है और इनको जूता उद्योग के एडवांस तरीकों की टे्रनिंग दी गयी है प्रशिक्षण केन्द्र में आधुनिक तकनीक से सुसज्जित यूनाइटेड नेशन्स इंडस्ट्रियल डेवलमेंट आर्गनाइजेशन के एक्सपर्ट भी है।
 

केन्द्रीय  पादुका प्रशिक्षण संस्थान जूता उद्योग में काफी सीनियर पोजिशन बनाये हुए हैं यह वास्तव में मेरे लिए हर्ष की बात है कि इस अवसर को आपके सामने रखूं। जो कि जूता उद्योग तकनीकी में विश्व में एक नयी विकास की खिड़की खोलेगा।
 

प्रशिक्षण के लिए आपको बधाई।

सभी शुभकामनाओं सहित

निदेशक

सी.एफ.टी.आई., आगरा

 

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